मूल रूप से राजस्थान के जोधपुर निवासी जस्टिस दलवीर भंडारी दूसरी बार हेग स्थित इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस में चुने गए हैं। उनके ब्रिटिश प्रतिद्वंद्वी जस्टिस क्रिस्टोफर ग्रीनवुड ने अपनी दावेदारी वापस ले ली। भंडारी को जनरल असेंबली के 183 और सिक्युरिटी काउंसिल के सभी 15 वोट मिले।
जस्टिस ग्रीनवुड के मैदान से हटने के बावजूद यूनाइटेड नेशन्स में वोटिंग करवाई गई। इसमें जस्टिस भंडारी को जनरल असेंबली के 183 और सिक्युरिटी काउंसिल के सभी 15 वोट मिले। भंडारी 2012 में आईसीजे के जज बने थे और उनका कार्यकाल 18 फरवरी में पूरा हो रहा है। इससे पहले भारत से जस्टिस नगेंद्र सिंह आईसीजे में दो बार चुने जा चुके हैं। भंडारी की इस जीत को भारत की बड़ी कूटनीतिक कामयाबी के तौर पर देखा जा रहा है। भारत ने जस्टिस भंडारी के लिए जबर्दस्त अभियान चलाया था। उनकी जीत के बाद सुषमा ने ट्वीट किया कि इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस में भारत की जीत हुई है। जज बनने के बाद आईसीजे में अब तक जितने भी फैसले हुए हैं, उनमें जस्टिस भंडारी का स्पेशल ओपिनियन रहा है। उन्होंने समुद्री विवादों, अंटार्कटिका में हत्या, नरसंहार के अपराध, वॉयलेशन ऑफ यूनिवर्सल राइट्स जैसे केसों में अहम भूमिका निभाई। इसके अलावा, पाकिस्तान में कैद भारतीय कुलभूषण जाधव को फांसी से बचाने में भी जस्टिस भंडारी की प्रमुख भूमिका रही। उन्होंने 2008 के भारत-पाक समझौते का हवाला देते हुए कहा था कि पाक ने ह्यूमन राइट्स का उल्लंघन किया है।
जोधपुर के नामी वकील महावीरचंद भंडारी के घर 1946 में जन्मे जस्टिस भंडारी ने जोधपुर यूनिवर्सिटी से लॉ करने के बाद अमेरिका से मास्टर्स डिग्री ली। राजस्थान हाईकोर्ट में कुछ सालों की प्रैक्टिस के बाद वे दिल्ली में प्रैक्टिस करने लगे। जस्टिस दलवीर भंडारी को 2014 में पद्मभूषण से सम्मानित किया गया था। आईसीजे नीदरलैंड के हेग में स्थित है। संयुक्त राष्ट्र चार्टर के आर्टिकल 93 के मुताबिक, यूनाइटेड नेशन्स के सभी 193 मेंबर्स देश आईसीजे में इंसाफ पाने के हकदार हैं। हालांकि, जो देश यूएन के मेंबर नहीं हैं, वे भी इसमें अपील कर सकते हैं। इसमें 15 जज होते हैं, जिनका कार्यकाल 9 साल का होता है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here